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बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: चार सीटें एनडीए के पक्की, पांचवीं सीट पर ओवैसी और छोटे दलों की भूमिका बनी निर्णायक
- Reporter 12
- 19 Feb, 2026
पटना: बिहार में 2026 के राज्यसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और 16 मार्च को पांच सीटों के लिए मुकाबला होने जा रहा है। वर्तमान विधानसभा समीकरणों के अनुसार चार सीटों पर एनडीए की बढ़त लगभग तय दिखाई दे रही है, जबकि पांचवीं सीट ने राजनीतिक गलियारों में रोमांच और सियासी सस्पेंस बढ़ा दिया है। इस बार राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, राजद के अमरेंद्र धारी सिंह व प्रेमचंद गुप्ता और रालोमो के उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनकी सीटों के लिए चुनाव होगा। एनडीए अपने संख्या बल के आधार पर चार सीटों पर मजबूत स्थिति में है और जनता दल (यूनाइटेड) की दो खाली हो रही सीटें भी गठबंधन के लिए सुरक्षित मानी जा रही हैं, जिससे राज्यसभा में एनडीए की ताकत बढ़ सकती है। राजनीतिक चर्चा का केंद्र इस बार रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की सीट रही है, क्योंकि लोजपा (आर) प्रमुख चिराग पासवान अपनी मां रीना पासवान को भेजने की मांग पर अड़े रह सकते हैं और इसके कारण कुशवाहा के लिए दोबारा सदस्यता पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सबसे दिलचस्प मुकाबला पांचवीं सीट को लेकर है, जहां विपक्ष के पास संख्या बल होने के बावजूद सहयोगियों के समर्थन पर निर्भरता होगी और छोटे दलों के वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं। इस सस्पेंस में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम पार्टी की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उनके पांच विधायक यदि विपक्ष के साथ खड़े होते हैं तो समीकरण सीधे बदल सकते हैं। वहीं बसपा और अन्य छोटे दलों का समर्थन भी सीट जीतने के लिए अहम होगा, क्योंकि किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 41 वोट चाहिए। इस बार का बिहार राज्यसभा चुनाव केवल संख्या बल का नहीं बल्कि गठबंधन, रणनीति और सामाजिक समीकरण की परीक्षा है, जहां चार सीटों की तस्वीर तो लगभग साफ है, लेकिन पांचवीं सीट का परिणाम आगामी सियासत का रुख तय करेगा और यह तय करेगा कि बिहार की राजनीतिक दिशा अगले वर्षों में किस तरह मुड़ेगी।
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